Saturday, 28 April 2012

नौकरी बनाम रिश्ते

दोस्तों, नौकरी पाना एक लड़ाई है जिसकी विडम्बना ये है ही सामने आप के अपने होते हैं . जिन दोस्तों के साथ आप ने अपने जीवन का सबसे अच्छा समय बिताया होता है . मैंने भी कुछ ऐसा ही झेला है .आज मैं इस चीज़ का एहसास करता हूँ की रिश्तों के आगे आपकी जरूरतें बड़ी है. नौकरी पाने की ख़ुशी की कोई बराबरी नहीं है आज मैं अन्दर से बहुत संतुष्ट महसूस कर रहा हूँ लेकिन इस वक़्त मुझे आमिर खान की पिक्चर याद आ रही है मैं उस्सको थोड़ा संशोधित करता हों की अपनी नौकरी न लगे तो दुःख होता है लेकिन अगर दोस्त की लग जाये तो और दुःख होता है इस बात का एहसास तब हुआ जब मेरे दोस्तों की नौकरी पहले लग गयी . मैं तो केवल इस बात को जनता हूँ हर किसी के लिए कुछ न कुछ जरूर है करने को और वही उस्सकी नियति
है मतलब डेस्टिनी तो उसका इंतजार करो और वो भी संयम के साथ. दोस्ती से पहले नौकरी नहीं हो सकती किस्सी भी हालात मैं क्योंकि नौकरी २२ साल के बाद मिली और ६० की उम्र तक ही रहेगी लेकिन दोस्त बचन से बने और मरते दम तक रहेगें .

1 comment:

  1. नौकरी करते रहो और मित्रों से संपर्क बनाये रखो बन्धु |और सभी कुछ समय पर ही होता है प्रयत्न निरंतर करते रहो ,और सही समय पर मिल भी गई नौकरी हमलोगों को और है भी अच्छी अब इससे अच्छा करने का प्रयत्न करना है भाई |बहुत ही अच्छा लिखा है |

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